तालीम नहीं डिगि्रयां बांटते हैं हम

संजय उवाच निजी क्षेत्र उच्च शिक्षा में अनगिनत नए पाठ्यक्रम ला रहे हैं, लेकिन सेवा से जुड़ा यह काम अब पूरी तौर पर व्यावसायिकता की गिरफ्त में आने के बाद बाकायदा धंधा बना दिया गया है। जाहिर है कि अब इसमें शराब और कुछ दूसरे किस्म का धंधा करने वाले लोग भी आ चुके हैं... [पूरी पोस्ट]
writer dr sanjay mishra
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[01 Jul 2009 07:49 AM]

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