बिखरी जिन्दगी

खट्टी-मीठी यादें दीवार से सटी बैठी सुजाता हाथ मे बन्धी पट्टी को एक़ टक घूरती हुई जैसे सुन्न सी ही हो गई पट्टी बान्धते -बान्धते उसने पाँच साल के बेटे रोहन को पास बुलाया ,पर रोहन ने साफ इन्कार कर दिया रोहन के मुँह से इन्कार सुजाता की जिन्दगी की सबसे बडी हार थीआँखो से अव... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा सचदेव
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[30 Apr 2009 04:36 AM]

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