" बेटियां "
बेटियां “ कोमल-सी टहनी होती है किसी वृक्ष की , मगर इरादा तने-सा सख्त रखती है बेटियां ! मुस्कुराहट से अपनी महकाती है घर को , ऐसी प्यार भरी पाती होती है बेटियां ! ख़ुशी और गम का हर रिश्ता निभाती है वो , रिश्तों को एक माला में पिरोती है बेटियां ! आज भी...
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sonal
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[08 Mar 2009 12:12 PM]



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