".......आतंकवाद क्यूँ .......?"
आतंकवाद क्यूँ ……? “ है आतंक-ही-आतंक फैला इस जहान में , है दर्द-ही-दर्द फैला इस जहान में ! आतंक जो फैला रहा वो भी एक इंसान है , आतंक के साए में जो पल रहा वो भी एक इंसान है , तो एक इंसान दूसरे इंसान का दुश्मन क्यूँ है ? इस प्यारे-से जहान में ये आतंकवाद...
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sonal
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[18 Apr 2009 14:29 PM]



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