' पिता '

sonal फूलों का खिलना , खिलकर महकना , हवाओं का चलना , फिज़ाओं का रंग बदलना , चिड़ियों का चहकना , भंवरों का गुनगुनाना , सागर की लहरों का हवाओं के साथ हिलोरें खाना , जैसे ये सब देन है इस सृष्टि के परमपिता की , वैसे ही हमारी ज़िन्दगी , ज़िन्दगी का हर एक पल , हमा... [पूरी पोस्ट]
writer sonal
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[19 Jun 2009 14:16 PM]

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