कर्फ़्यू के साये में ख़ामोश मेरे शहर से एक इल्तिजा !
नसीब से मिलता है किसी शहर को अमन नसीब से मिलती है धूप गली मोहल्ले की रौनक़े बच्चों की आवाज़ें,शोर नसीब से मिलता है दरवाज़े पर दूध अख़बार और सब्ज़ियाँ मिलते हैं नसीब से पास-पडौस सोहबतें और ठहाके नसीब से मिलता है विश्वास,अपनापन और हँसी नसीब से ही मिलते हैं...
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इन्दौरनामा
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[04 Jul 2008 11:49 AM]



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