योर ऑनर, दिज़ आर माई आर्ग्यूमेंट्स
अगली तारीख़. 22 नवंबर 2007. अदालत पहुंची. नज़ारा पिछली तारीख़ जैसा ही. वही मर्दों की दुनिया. मैं और स्टे नो, केवल दो औरतें. भोजनावकाश के बाद फिर से अर्दली की पुकार. रामकुमार का नाम. जज साहब के सामने मैं और हाथ में खुल चुकी फाइल. बेझिझक, पूरे आत्मविश्...
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चन्द्रा निगम
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[05 Jul 2008 05:51 AM]



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