वंदना
भारति जय विजय करॆ कनक शस्य कमल धरॆ लंका पदतल शतदल गर्जितोर्मि सागर जल धोता शुचि चरण युगल स्तवकर बहु अर्थ भरॆ भारति जय विजय करॆ निराला...
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भारतेंदु मिश्र
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[23 Feb 2009 06:02 AM]



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