अमृत महोत्सव
छंद प्रसंग के केन्द: पं. देवेन्द्र शर्मा इन्द्र के पिछत्तर वर्ष पूरे होने पर यात्रा पिछत्तर वर्ष की भीगा हुआ मन का पुलिन है व्यक्त कर पाना कठिन यह शुभ दिवस है जन्म दिन उस सूर्य का । जिससे प्रकाशित हृद-गगन है गंधमय जिसका सृजन आलोकधर्मा प्रतिफलन वैदूर्...
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भारतेंदु मिश्र
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[03 Apr 2009 11:45 AM]



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