(शोक गीत)
युवा कवि रामलखन के असामयिक निधन पर रामलखन तिकड्म की दुनिया मे रहकर बहुत जी गये रामलखन बडे बडो के बीच छुपे रुस्तम निकले तुम रामलखन। अपनी शर्तो पर जीने का हस्र यही सब होना था घरवालो को बीच राह मे छोड गये तुम रामलखन। कविता छूटी दुनिया छूटी सारे सपने छूट...
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भारतेंदु मिश्र
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[24 Aug 2009 16:58 PM]



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