मुंबई की बात निराली...

manodasha अपने तरह का एक अकेला शहर है ये, सोता नहीं है, ऊंघता आठों पहर है ये। इस पेड़ की छाया में बसे हैं कई लोग, जो चाहे रह जाए सबका घर है ये। किस्मत आजमाने आते हैं यहां सब, किसी की मंजिल, किसी की रहगुजर है ये। इस शहर को अपनाना बहुत मुश्किल है, रुकता है वही,... [पूरी पोस्ट]
writer रवि रावत
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[19 May 2009 11:23 AM]

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