क्या लिखूं
क्या लिखूं ये सोचते सोचते एक साल बीत गए, फ़िर याद आए पदुम लाल पुन्ना लाल बख्शी जी, उनका एक ललित निबंध था क्या लिखूं? सोचा चलो इसिस शीषर्क के साथ कुछ अगड़म बगड़म लिख डाला जाय, तभी गूगल महाराज की याद आई और सोचा की भाई खोज लू कितने लोग मेरी तरह क्या लिख...
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प्रवीण शर्मा
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[28 Dec 2008 16:58 PM]



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