एक पत्र पप्पू के नाम

सुमित के तड़के (गद्य) प्यारे पप्पू भइया, सादर पप्पूस्ते, आपसे बतियाने की इच्छा हुई तो सोचा कि चलो यह बातचीत पत्र द्वारा ही कर ली जाए। कल सुबह उठा तो छोटी बहन घबराती हुई घूम रही थी। वह सबेरे जल्दी ही नहा धोकर तैयार हो गई थी। उससे उसकी घबराहट का कारण पूछा तो उसने बताया कि व... [पूरी पोस्ट]
writer सुमित तोमर
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[09 Dec 2008 04:48 AM]

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