ठेठ हिंदी का ठाठ
आज एक नकली हिंदी सब तरफ छायी हुई है. कारण कि जिसे देखो वह अंग्रेजी की बैसाखी के बिना सोचना ही नहीं चाहता. नतीजा यह कि वाक्य विन्यास हो या कहने का सलीका, सब पर अंग्रेज़ी की छाया है. जिससे हिंदी की पठनीयता बुरी तरह प्रभावित होती है. मसिजीवी...
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वेद प्रकाश
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[11 Dec 2007 05:08 AM]



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