a scrap of amrish sharma

world of dream क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता सच ये है के जैसा चाहो वैसा नही होता कोई सह लेता है कोई कह लेता है क्यूँकी ग़म कभी ज़िंदगी से बढ़ कर नही होता आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे यहाँ ठोकर देने वाला हैर पत्थर नही होता क्यूं ज़िंदगी की मुश्क़िलो से... [पूरी पोस्ट]
writer rahul pandit
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[17 Aug 2009 11:29 AM]

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