बहुत दिनों बाद

kamlesh pandey बहुत दिनों बाद एक बार फिर कूकी कोयल चुप बैठा काक भी कुछ बोला टूटी मनहूस छायी चुप्पी बोला कुछ तो बोला। पर तुम हो क्यों चुप होंठ हैं क्यों सिले ? आंखों से उतर खामोशी जिह्वा तक है क्यों फैली ? चुप रहना न कुछ कहना भला, यह भी कोई बात हुई - कहते हैं - न कु... [पूरी पोस्ट]
writer kamlesh
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[28 Jun 2009 09:04 AM]

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