मित्र

kamlesh pandey बड़े दिनों बाद तुमसे मिलना हुआ मित्र। ऍसा लगा मानो खुद से ही मैं मिला सच - कठिन हो गयी है अब खुद से खुद की मुलाकात, ऍसे में तुमसे मिलना मानो किसी फूल का खिलना तपती दोपहरी में बदली की छांव का पसरना किसी अबोध के चेहरे पर निश्छल मुस्कान का उभरना। अकेला... [पूरी पोस्ट]
writer kamlesh
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[02 Aug 2009 10:00 AM]

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