अभिव्यक्ति के खतरे

kamlesh pandey मैं अक्सर चुप ही रहता हूं क्योंकि अभिव्यक्ति के खतरे बहुत हैं। मेमने की तरह मिमियाते भी लोमड़ियां अपने दांत पैना करने लगती हैं। अक्सर ऍसा होता है नहीं चाहते हुए हमारी दुम हिलने लगती है। मैं नहीं समझ पाता - आदमी क्यों कर डर जाता है एक दूसरे से ? सच जा... [पूरी पोस्ट]
writer kamlesh
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[04 Sep 2009 10:44 AM]

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