ओ लिखने वालो
ओ लिखने वालो कलम खूब क्या लिखती है , अपने ही खून स्याही से , कागज़ के कोरे जीवन को , भरती है मुक्त सदाई से | लिखने वालों ने स्याही का मतलब और बना डाला , भाषा , मजहब , देश निहित में , नंगा नाच नचा डाला | ओ लिखने वालो तुमसे मेरी , यही गुजारिश है मत लिख...
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रवि शंकर शर्मा
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[30 May 2009 12:17 PM]



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