गुनाहगार हैं रहने दो मुंह िछपाए हुए

kalyani Devesh कहने की बात है,िसतारों से हम िमले... हर बार जो देखा कोई चील आसमांं पर िदन का तारा बनी नजर आई। सूरज बादलों की ओट में एेसे िछपा थे जैसे झगड़े के बाद बीच वाले बीवी के पहलू और दरवाजे की ओट में रहते हैं। िदल्ली में संतोष के बाद तािहर ने भी दम तोड़ िदया ।... [पूरी पोस्ट]
writer Devesh
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[28 Sep 2008 15:43 PM]

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