मौलिकता
हिन्दी के श्रेष्ठ साहित्यकार रामनारायण उपाध्याय मौलिकता को कुछ इस तरह से व्यक्त करते है-क्या यह नही हो सकता कि हम जैसे हैं,ठीक वैसे ही मिले और जो हम नही हैं,वैसा दिखने का प्रयत्न बंद कर दे ?जैसी सुखी रोटी तुम खाते हो,वैसी ही मुझे भी खिलाओ / जिस फटे ट...
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संगीता-जीवन सफ़र
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[10 Oct 2008 10:59 AM]



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