रात अभी बाकी है.....

रमता जोगी बहता पानी.... गहन अंधेरा है उजास नजर आता नहीं हर तरफ कुहासा है क्योंकि रात अभी बाकी है.... ताज पर फिर फहरा गया तिरंगा लेकिन जमीं पर बिखरा खून अभी बाकी है शर्मिंदा है जमीर, माँ की नहीं कर पाया रक्षा हर सिर है झुका क्योंकि रात अभी बाकी है.... उजाले के लग रहे हैं कया... [पूरी पोस्ट]
writer श्रुति अग्रवाल
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[01 Dec 2008 01:58 AM]

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