महाशक्ति को जूता !

रमता जोगी बहता पानी.... बुश साहब बेज्जती के जो सपने हम बगदादियों को चैन की नींद सोने नहीं देते जूते के रूप में ऐसे ही सपने तुम्हें भी मुबारक हो " गुस्सा, नफरत, भय और भयावह रुदन के बीच रोज मरती आत्मा। सपनों में, हकीकत में खुद को धिक्कारती...बार-बार अहसास दिलाती कि आत्मसम्मान... [पूरी पोस्ट]
writer श्रुति अग्रवाल
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[16 Dec 2008 01:42 AM]

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