कुछ अहसास...
कुछ अहसास ओस की बूंदो के जैसे करते है रुह को ताजा ... कुछ अहसास ठंडी हवा की तरह देते हैं मन की अगन को सुकून... कुछ अहसास भीगे होठों की तरह भरते हैं बंजर जमी में नमी... कुछ अहसास प्रेम की बूँदों के जैसे आंखों से बहने से पहले संभल जाते हैं... गिर के जम...
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श्रुति अग्रवाल
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[20 Dec 2008 05:13 AM]



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