विनयना

कथा सरित सागर स्कूल नजदीक आ चुका है. जाने कब के नौ बज चुकें हैं. कितनी भी जल्दी कर लो किंतु रोज सवा नौ-साढे नौ तो हो ही जातें हैं. भागते हुये गेट से अन्दर घुसी . मुझे जिस क्लास मे पहुँचना है, वह क्लास रूम अन्दर की तरफ- आंगन के दूसरे छोर में है. हमेशा की तरह रास्ते... [पूरी पोस्ट]
writer padma rai
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[18 Aug 2008 08:57 AM]

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