बहादुरी ( लघु कथा)
दस दिनों से शहर, कर्फ्यू से पस्त हिम्मत था. इतंने दिनों के बाद आज पहली बार कर्फ्यू में दो घंटे की ढील दी गयी है. कोतवाल साब की आंखें मूंदी जा रहीं थीं .दस दिनों से वे ठीक से सो नहीं पाये थे, आज थोडी देर के लिये जरा पीठ सीधी करने की इच्छा थी लेकिन अब...
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padma rai
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[06 Sep 2008 00:57 AM]



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