अपनी शिनाख़्त
हर वक़्त फ़िज़ाओं में महसूस करोगे तुम, मैं प्यार की ख़ुशबू हूं, महकूंगा ज़मानों तक प्यार लुटाना कोई आसान काम नहीं। कलेजा चिर जाता है. अपने दुखों को तकिए के नीचे रख कर सुखों का ख़्वाब दिखाने वाले कितने हैं ? और उन कितनों को याद करने वाले आज कितने हैं?...
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aalok shrivastav
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[01 Sep 2008 02:58 AM]



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