अब कोलकाता नहीं आते पूरबिया बालम

Srirajesh श्रीराजेश ज्यादा दिन नहीं हुए। अस्सी के दशक तक बंगाल की पहचान जूट मिलों से थी। लाखों श्रमिक इस उद्योग से जुड़े थे। जूट मिलों की चिमनियों से निकलता धुआं लाखों पाट किसानों को भरोसा देता था। भोजपुरी प्रदेश के लोकगायन में पूरबी की प्रधानता कलकत्ता गये बा... [पूरी पोस्ट]
writer स्वपरिचय
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[17 Jul 2008 06:43 AM]

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