कसक-2008

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...... देख रहा था दूर सूर्य को सिर्फ अंधेरा पाया नवजीवन की इस बेला में घोर कष्ट था छाया मानव दानव बन बैठा है मन में छिपा कपट बैठा है इंतजा़र में बूढ़ी मां ने त्याग दिया इन आंखों को मन को मारा उस बेवा ने छीना जिसका पति उन्होंने ये इंतज़ार की सिसकन है ये सिसक... [पूरी पोस्ट]
writer anupam mishra
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[17 Jan 2009 08:51 AM]

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