श्रमजीवी-स्लमजीवी

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...... उन गलियों में सड़कें नहीं होती। सड़कों के नाम पर उनके ही द्वारा बनाई गई कुछ पगडंडियां होती हैं जिनके किनारे बसता है भारत का श्रमजीवी भविष्य। टीन के नीचे सोता भारत का बहुत बड़ा तबका। ये तबका और श्रमजीवी भविष्य 24 घंटे संघर्ष में बिताता है या यूं कहें... [पूरी पोस्ट]
writer anupam mishra
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[17 Mar 2009 04:07 AM]

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