बड़ा महंगा है ये रब, जो “तुझमें दिखता है”

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...... पीढ़ी बदल चुकी है। आदिकाल नहीं रहा। बेचारे नंगे पुंगे वो लोग जो पत्तों से अपने तन को ढका करते थे । सिलाई मशीन से सिले कपड़ों के दिवाने हो चुके हैं। वो खेतिहर मजदूर भी नहीं रहे जो अपने जीवन यापन के लिए जानवरों पर निर्भर होते थे, जानवरों से खेती करवाना... [पूरी पोस्ट]
writer anupam mishra
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[07 Apr 2009 04:53 AM]

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