भाषा तो ऐसी होती है (शाहजहांपुर के गंवार से दिल्ली की ‘खड़ी बोली’तक)

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...... सतत्, निरंतर, लगातार, यही परिभाषा है समय की। जो न कभी थकता है, न किसी का इंतज़ार करता है, और न ही किसी का मोहताज है। सबको इसी के हिसाब से चलना पड़ता है। मिट्टी की खुशबू हमेशा ज़हन में बसी रहती है सो आज भी वही सुगंध एक बार फिर हिलोरें मारने लगी। और खु... [पूरी पोस्ट]
writer anupam mishra
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[09 Apr 2009 04:46 AM]

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