मिडिल क्लास भगवान
बारि मथे घृत होई, सिकता ते बरु तेल,। बिनु हरि भजन न भव तरिअ, यह सिद्धांत अपेल ।। महाकवि तुलसीदास ने रामचरित मानस के उत्तर कांड में इन पंक्तियों का ज़िक्र किया है। जिसका अर्थ है कि हवा को मथने से घी बन सकता है, और रेत से तेल निकल सकता है, लेकिन बिना ई...
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anupam mishra
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[10 Apr 2009 07:39 AM]



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