दइया रे दइया ‘बदल गई वो’

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...... छरहरी काया, इठलाता बदन, बिल्कुल हिरणी के जैसा। आंखों में तीर सा चुभने वाला शार्प सा काजल, होंठों पर गुलाब की झलक। एक दम मादक सी हंसी। और उस पर गालों में पड़ने वाला भंवर। ओफ्फो एक अनूठी याद थी वो। लगता था कुदरत ने सारी फुरसत उसी पर उड़ेल दी हो। उसके ब... [पूरी पोस्ट]
writer anupam mishra
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[15 Apr 2009 09:41 AM]

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