अभिव्यक्ति की छटपटाहट और खतरे
मैं खुद को एक ऐसा निबंधकार मानता हूं जो उपन्यास शैली में निबंध लिखता है और निबंध शैली में उपन्यास, लिखने की बजाय मैं उन्हें फिल्मा देता हूं। यदि कभी सिनेमा न रहा तो मैं इस नियति को सहजता से स्वीकार कर लूंगा और टेलीविजन की ओर मुड़ जाऊंगा, यदि टेलीविजन...
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दिनेश श्रीनेत
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[08 Dec 2008 19:08 PM]



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