जान की कीमत

पुरानी  डायरी जान की कीमत आज फिर हो गई एक ट्रेन दुर्घटना ....... सैकडों मरे ...... इतने ही घायल ... कई कलाइयाँ सूनी हो गई कितने ही बेसहारा हो गए ..... कटी फटी लाशें .... विकृत चेहरे .... जमा लोग .... अपनों को खोजती निगाहें .... राहत कार्य के नाम पर ... हाथ की घडिय... [पूरी पोस्ट]
writer vallabh
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[01 Aug 2009 00:17 AM]

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