तुम्हें क्या याद आया--

shabdsudha कई बार यादें बहुत तंग करती है, अगर अपने साथ छोड़ चुके हों. तो कई बार मन छोटी सी बात पर भी भारी हो जाता है. ऐसे में कुछ लिखा गया-- पेश है-- तुम्हें क्या याद आया-- तुम अकारण रो पड़े-- हमें तो टूटा सा दिल अपना याद आया, तुम्हें क्या याद आया-- तुम अकारण रो... [पूरी पोस्ट]
writer Shabdsudha
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[26 Aug 2009 02:52 AM]

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