क्यूँ करूं पूजा मैं तेरे भगवान् की....
क्यूँ करूं पूजा, मैं तेरे भगवान् की, अस्तित्वविहीन, एक सत्यहीन अनजान की.. लंगड़ा-लूल्हा, मूक-बधिर, आँखों से पैदल है वो, शक्ति सिर्फ कथाओं में है उस बानर हनुमान की, जानकी को वन भोग हुआ, जब पाँव उसके भारी थे, कैसी धृष्टता थी यह, उस पापी कपटी राम की, प्र...
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राहुल कुमार
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[10 Oct 2009 04:26 AM]



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