तेरी बंदगी देखकर, मैं झुक गया मेरे भाई..
वो कहता है, वाह! क्या माल है? कुड़ी ग़ज़ब है, बेमिसाल है, उसकी फीगर! ओह! काश! एक रात के लिए! आ जाती, जवानी की उठी प्यास के लिए.. अपनी मर्दानगी का अहसास है उसे, पर खुदा का भी आभास है उसे, कहता है, राहुल भाई मैं अल्लाह के खिलाफ कुछ नहीं सुन सकता, उनके ख...
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राहुल कुमार
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[10 Oct 2009 04:27 AM]



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