मुल्क की मय्यत में आना होगा...
अफवाहों के बाज़ार में, आजकल, समाचार में, महसूद है सुर्खियों में, टीवी और अखबार में, बेतुल्लाह भी, हकीमुल्लाह भी... पीठ थपथपाने का दौर है, औपचारिकताएं अभी और है, जो खबर अभी अपुष्ट है, उससे जनता संतुष्ट है, और उस खबर की कहाँ फिकर है, जहां अध-नंगों, भूखो...
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राहुल कुमार
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[10 Oct 2009 04:30 AM]



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