1- गालिब ने

मेरे पंख,,,,,,,,,,,,,,,,, गालिब ने सब कुछ कह दिया यूं ही ओ मेहरबानों ! तुम्‍हें मेरे कहने पर रंज है क्‍यूं , आज फिर से आसमां जमीं से सिमटना चाहता है समुंदर की गहराइयों में खो जाना चाहता है चोटियों की ऊंचाइयों को चूमना चाहता है तल पर दौड़ना चाहता है फूलों से अठखेलियां करना चाह... [पूरी पोस्ट]
writer Samyak
views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Jun 2008 01:08 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix