जागो फिर एक बार
जागो फिर एक बार देखो क्या कह रही है ये वक्त की बयार आओ मेरा सीना चीर के भरो एक नई हुंकार जागो फिर एक बार कितना भी ये दुनियावी सर्प फुंफकारे बार-बार कुचल के रख दो इसके फण को कर दो इसके विष को तार तार जागो फिर एक बार। आंखों की कोठरियां पसलियों की टोक...
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Samyak
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[21 Jun 2008 02:35 AM]



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