अधूरा,,,,,,,,,,,,,,,,, भाग एक

मेरे पंख,,,,,,,,,,,,,,,,, यहां हर अरमा पूरा कहां हो पाता है मौत तो पूरी है पर उसके पहले बहुत कुछ अधूरा रह जाता है । वक्‍त का घूमता पहिया घूमता ही जाता है हर दुआ-बद्दुआ को कुचलता ही जाता है अपनों को गैर बनाता जाता है हर साया पीछे छूटता और छूटता रह जाता है कहीं कुछ अधूरा रह जात... [पूरी पोस्ट]
writer Samyak
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[21 Jun 2008 02:59 AM]

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