जाने कब,,,,,,
जाने कब किस घड़ी जिंदगी की शाम हो जाए आखिरी आरजू है बस यही कि- तेरे आगोश में सांसों को ऐहतराम मिल जाय ऐ! खुदा मेरी रूह को तेरी बाहों में पनाह मिल जाय।। 'पंख'...
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Samyak
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[21 Jun 2008 03:49 AM]



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