हो दिल खुश जहां,,,,,,,,,

मेरे पंख,,,,,,,,,,,,,,,,, चल मुसाफिर चल हो दिल खुश जहां अब वहीं पे चल दिल यहां लगता ही नहीं ढूंढ रहा दिल सिर्फ़ हसीं रूमानियत के पल चल मुसाफिर चल हो दिल खुश जहां अब वहीं पे चल। ये दुनिया समेटे लगती है सिर्फ़ ग़मों के पल सांसों का कारवां घुट रहा हर पल धड़कनों का जहां रुक रुक क... [पूरी पोस्ट]
writer Samyak
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[19 Aug 2008 06:16 AM]

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