अनुपम माँ !!
माँ मैं तुमको क्या उपमा दूं । जग की सब उपमाएं छोटी स्वर्ग की बातें होती झूठी जग का निर्माता विश्व - विधाता ईश्वर भी तुमसे कम है, फिर मैं तुमको क्या उपमा दूं ॥ मुझे गढने वाली उस माँ को नमन जो स्मृति रुप में सदैव जागृत है, उपस्थित है ; वैसे ही, जैसे मे...
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RDS
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[15 Sep 2008 23:45 PM]



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