शुभ-कामनाएं
शुभ कामनाएं मधुमय उपवन में पंछी युगल बन तुम रहो। स्नेह की झिलमिल अरुणिमा पथ प्रशस्त करती रहो। चित्र बनते जा रहे हैं तूलिका थकती नहीं। चांदनी को एक टुकड़ा बन सदा झरती रहो। राह कितनी हो कठिन धूप कितनी तेज़ हो। स्निग्ध मानव मन तुम्हारा बस साथ तुम चलती र...
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उषा वर्मा
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[10 May 2009 18:06 PM]



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