मैने एक सपना देखा था

क्षितिज मैने एक सपना देखा था. एक सपना जो ख़ुद-ब-ख़ुद अपने पैरों चल कर आया था। मैने उसे नहीं बुलाया था। उस सपने का न कोई मजहब था , न कोई वतन था, न कोई रूप- रंग था। यह महज़ यादों का एक सिलसिला था।... [पूरी पोस्ट]
writer उषा वर्मा
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[02 Jul 2009 17:52 PM]

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