दिव्य दृष्टि

LIFE: AS I SEE IT आंखों को कम मत आन्किये आंखें खदान है सपनो की गहराईयां इन की थामे है खामोशियाँ ग़ैर अपनों की छुपा है इन के गह्वर मे हरेक भाव इस दिल का इन ही के झुकने उठने से बंधा है अर्थ हर वचन का ख़ुशी इन मे झलकती है जो कोई ख्वाब सच होता है कसक के बादल छाते है जो को... [पूरी पोस्ट]
writer Paridhi Jha
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[25 Jul 2007 09:33 AM]

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