आह्लाद
आज सब नया सा है , हर लम्हा हर धड़कन हर पत्ता हर तिनका, आज सब मी कोई बात है या बदल गया है कुछ मुझ मे? हाँ ... मुझमे ..... आज मैं खुश हूँ आज मैं दुनिया बदल दूँगी ... आज दिल मे एक ललक सी है ..... आज मैं कुछ भी कर सकती हूँ .... आज बादलों की सीढ़ी बुन कर ....
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Paridhi Jha
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[13 May 2008 11:29 AM]



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